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Monday, March 23, 2009

एक नई दिशा

एक नई दिशा हैं , नई दिशा , एक नई दिशा

एक नई दिशा से चलकर देखें , एक नई दिशा हैं


संबंधो का अजीब चक्कर,

आपस में अपनों से टक्कर

दुःख देते हैं, दुःख लेते हैं,

आखिर ये सब क्यें कर? एक नई दिशा हैं


इस नई दिशा की तहजीब क्या हैं ?

नई दिशा की तरकीब क्यां हैं ?

ये नया सलीका ,नया तरीका,

नई सोच, नई पहचान ? हैं कैसे दिशा ?

हैं सरल दिशा, खुला हैं भेद,

नया माध्यम , वही संकेत,

नई हैं आशा, अभीलाषा,

प्रेम ही इसकी परिभाषा हैं ऐसी दिशा

सुनने का हैं दंग नया,

कहने का हैं रंग नया

नज़र वही,नजरिया नयी,

साज़ वही,आवाज़ नयी हैं ऐसी दिशा

गुण देखें,अवगुण न देखें,

ख़ुद को बस अगले में देखें,

विचार की धारा देखें,

उसीको नए तरह से देखें हैं ऐसे दिशा

इस नयी दिशा से क्यें चले हम?

जो चल रहा हैं, क्यें बदले हम?

ये नया सुर , ये नया ताल,

ये नया राग, ये नयी रागिनी-क्यें सीखे हम?

गौर से देखो, दौर नया हैं,

बदल रहा मौसम नया हैं,

तौर तरीके बदल रहें हैं,

बदल रही सारी दुनिया हैं नयी दिशा से चल रही हैं

इस नए दौर से क्यें डरते हो?

हिचकिचाहट क्यें करते हों?

गर जीना हैं इस दुनिया में?

तो बदलना ही हैं हमें नयी दिशा से चलना हैं

इस नयी दिशा से चलकर देखें,

नया सपना सब मिलकर देखें,

ये नया होश हैं,नया जोश हैं,

नयी जान , हैं नया जहाँ इस नयी दिशा से

अर्थ वही,भावार्थ नया,

गाने का अंदाज़ नया,

हैं वही सुर, हैं वही ताल,

हैं वही राग, ख्याल नया इस नयी दिशा से

हो तुम वही,हैं हम वही,

हैं बोल वही,बोली नयी,

हैं दिल वही,धड़कन वही,

हैं साँस वही,अहसास नया इस नयी दिशा से

बदलना हैं,पर समय कहाँ,

वक्त के हैं, बड़े सख्त यहाँ,

फुर्सत मिलेगी जब काम से

तब बदलेंगें आराम से

काल चक्र से कौन बचा हैं

बीते कल से आज रचा हैं,

तब की बात कुछ और रही,

अब जो हैं,अभी नही

अब समय हैं निर्णय का,

तूफान आंधी, प्रलय का,

बैठे बहने की आड़ में,

तो बह जायेंगे बाद में

समझके वक्त के तकाजे को

जो ‘आ’ कहे बदलो को

बस वही टिके रहेंगे

बाकि सब डल जायेंगे

अबतक जो करते आयें हैं

गर वही करते रहेंगे,

अब तक जो पाते आयें हैं,

वही पाते रहेंगे

बने रहे कोल्हूके बैल

वही बीज, तो वही तेल,

मुक्त करें, बंधन को खोलें,

नयी पारी,नयी लगन से खेलें

इस नयी दिशा से चलकर देखें,

नया सपना सब मिलकर देखें, ,

वीरानो में खिलकर देखें,

नयी अगन में जलकर देखें,

एक नयी लगन से खुलकर देखें,

ख़ुद,बस थोड़ासा बदलकर देखें,

नयी दिशा हैं,नयी दिशा हैं, नयी दिशा हैं,

इस नयी दिशा से चलकर देखें, नयी दिशा हैं

रचनाकार- अरविन्द नादकर्णी


Monday, January 19, 2009

आज कि ताज़ा khabar

आज सुनो आवाज सुनो....मैं इधर बहुत दिनोसे सोच रहा था कि कुछ खबरों का ब्लॉग सुरु किया जाए जहा मैं रोज की रोज कानपूर की खास खबरें दल दिया करूँ और बाकि लोग पड़ लिया करें पर मुझे लगता हैं कि मैं आज कम को सुरु कर दिया हैं.तो अब आप कि बरी हैं साडी खबरें पड़े और मुझे बताएं कि आप किस तरह कि खबरें पड़ना चाहते हैं मैं वैसे कि वैसे खबरें फ़िर ज्यादा से ज्यादा प्रकाशित किया करूँ।

अब ये देखिये कि कल का दिन कानपूर के लिए अच्छा नही रहा .असल में यहाँ पर पुलिस और टेंपो वालो कि पार्टनरइसप चलती हैं जहा पर कुछ ले देके वो टेंपो को कही भी रोक सकते हैं कही भी खड़ा कर सकते है और तो और कितनी भी सवारिया बैठा सकते हैं.तो हुआ भी वाहजी। कल एक महिला होमगार्ड ने एक टेंपो वाले को रोका तो वो भगा और भागा भी ऐसे कि अपने साथ पुरे टेंपो को लेते के ६ फिट के गद्दे में जाके गिरा दिया और फ़िर होमगार्ड तो wआहन से भाग गई और सावरिया अपने अपने घर चली गई और कहानी वही कि वही रही...यानि कि कल फ़िर कोई टेंपो को गद्दे में गिरा देगा और कोई मर भी जाए तो किसी को क्या फरक पड़ता है...