Thursday, September 8, 2022
मजेदार कहानी
Wednesday, September 7, 2022
आज की जनता
Wednesday, October 13, 2010
मेरे पापा
तुम रोते भी हो पर हम हसते है ,क्येंकि तुम्हरे आसूँ नहीं बताते है
पापा तुम हो तो कार है, खिलोने है , घोडा है गाड़ी है
पापा तुम हो तो जग कि हर खुशी मेरी मुठी में है
माँ महान है उनका जैसे कोई नहीं उन्होंने हर कुछ दिया पूरी शिक्षा दी, सब सिखाया सब समझाया
पर पापा जो तुमने शांत रह कर प्यार से ,बिना कहे बिना सुने जो कहा वो हर पल दिल ने समाया
पापा तुम सब सहते हो, सब सुनते हो , थक जाते हो पर आप दुखी नहीं होते
तुम जादू हो, तुम ईश्वर हो, तुम पापा हो पर कभी नाराज नहीं होते
पापा तुम रात में माँ के सोने के बाद भी मेरे एक आवाज में उठ जाते
पापा तुम दिन में और रात में मेरे चेहरे को देखते और फिर सोने जाते
पापा अगर हम बीमार है तो तुम बीमार हो, अगर हम नाराज है तो तुम नाराज हो
पापा अगर हम भूखे है तो तुम भूखे हो, अगर हम प्यासे है तो तुम प्यासे हो
पापा तुम्हारे सपने है हम, पापा तुम्हारी दुनिया है हम
पापा तुम हमारे सूरज और हम आक के चंदा हैं हम
पापा तुम कितने अच्छे हो, पापा तुम कितने सीधे हो, पापा तुम प्यारे हो
पापा तुम तुम हो तुम दुनिया में सबसे लाज़बाब और हमारे हो तुम
पापा तुम सुबह निकले तो हम साथ थे, तुम रात को आये तो हम साथ थे
पापा तुम जागे तो हम साथ थे, तुम सोये तो हम साथ थे
पापा अब तुम आराम करो, पापा अब तुम आदेश करो..
पापा अब आप मैं हूँ, पापा तुम अब अपना ख्याल करो
पापा आप ने वो सिखाया जो , आज मैं अपने पैरो पर खड़ा हुआ
पापा आप का एक एक शब्द आज मेरा जबाब हुआ
मेरे पापा मेरे पापा तुम हो सबसे न्यारे तुम हो हमको प्यारे
तब भी पापा अब भी पापा तुम आज तक बेमिसाल हो...
Monday, March 23, 2009
एक नई दिशा
एक नई दिशा हैं , नई दिशा , एक नई दिशा
एक नई दिशा से चलकर देखें , एक नई दिशा हैं
संबंधो का अजीब चक्कर,
आपस में अपनों से टक्कर
दुःख देते हैं, दुःख लेते हैं,
आखिर ये सब क्यें कर? एक नई दिशा हैं
इस नई दिशा की तहजीब क्या हैं ?
नई दिशा की तरकीब क्यां हैं ?
ये नया सलीका ,नया तरीका,
नई सोच, नई पहचान ? हैं कैसे दिशा ?
हैं सरल दिशा, खुला हैं भेद,
नया माध्यम , वही संकेत,
नई हैं आशा, अभीलाषा,
प्रेम ही इसकी परिभाषा हैं ऐसी दिशा
सुनने का हैं दंग नया,
कहने का हैं रंग नया
नज़र वही,नजरिया नयी,
साज़ वही,आवाज़ नयी हैं ऐसी दिशा
गुण देखें,अवगुण न देखें,
ख़ुद को बस अगले में देखें,
विचार की धारा देखें,
उसीको नए तरह से देखें हैं ऐसे दिशा
इस नयी दिशा से क्यें चले हम?
जो चल रहा हैं, क्यें बदले हम?
ये नया सुर , ये नया ताल,
ये नया राग, ये नयी रागिनी-क्यें सीखे हम?
गौर से देखो, दौर नया हैं,
बदल रहा मौसम नया हैं,
तौर तरीके बदल रहें हैं,
बदल रही सारी दुनिया हैं नयी दिशा से चल रही हैं
इस नए दौर से क्यें डरते हो?
हिचकिचाहट क्यें करते हों?
गर जीना हैं इस दुनिया में?
तो बदलना ही हैं हमें नयी दिशा से चलना हैं
इस नयी दिशा से चलकर देखें,
नया सपना सब मिलकर देखें,
ये नया होश हैं,नया जोश हैं,
नयी जान , हैं नया जहाँ इस नयी दिशा से
अर्थ वही,भावार्थ नया,
गाने का अंदाज़ नया,
हैं वही सुर, हैं वही ताल,
हैं वही राग, ख्याल नया इस नयी दिशा से
हो तुम वही,हैं हम वही,
हैं बोल वही,बोली नयी,
हैं दिल वही,धड़कन वही,
हैं साँस वही,अहसास नया इस नयी दिशा से
बदलना हैं,पर समय कहाँ,
वक्त के हैं, बड़े सख्त यहाँ,
फुर्सत मिलेगी जब काम से
तब बदलेंगें आराम से
काल चक्र से कौन बचा हैं
बीते कल से आज रचा हैं,
तब की बात कुछ और रही,
अब जो हैं,अभी नही
अब समय हैं निर्णय का,
तूफान आंधी, प्रलय का,
बैठे बहने की आड़ में,
तो बह जायेंगे बाद में
समझके वक्त के तकाजे को
जो ‘आ’ कहे बदलो को
बस वही टिके रहेंगे
बाकि सब डल जायेंगे
अबतक जो करते आयें हैं
गर वही करते रहेंगे,
अब तक जो पाते आयें हैं,
वही पाते रहेंगे
बने रहे कोल्हूके बैल
वही बीज, तो वही तेल,
मुक्त करें, बंधन को खोलें,
नयी पारी,नयी लगन से खेलें
इस नयी दिशा से चलकर देखें,
नया सपना सब मिलकर देखें, ,
वीरानो में खिलकर देखें,
नयी अगन में जलकर देखें,
एक नयी लगन से खुलकर देखें,
ख़ुद,बस थोड़ासा बदलकर देखें,
नयी दिशा हैं,नयी दिशा हैं, नयी दिशा हैं,
इस नयी दिशा से चलकर देखें, नयी दिशा हैं
रचनाकार- अरविन्द नादकर्णी
Monday, January 19, 2009
आज कि ताज़ा khabar
अब ये देखिये कि कल का दिन कानपूर के लिए अच्छा नही रहा .असल में यहाँ पर पुलिस और टेंपो वालो कि पार्टनरइसप चलती हैं जहा पर कुछ ले देके वो टेंपो को कही भी रोक सकते हैं कही भी खड़ा कर सकते है और तो और कितनी भी सवारिया बैठा सकते हैं.तो हुआ भी वाहजी। कल एक महिला होमगार्ड ने एक टेंपो वाले को रोका तो वो भगा और भागा भी ऐसे कि अपने साथ पुरे टेंपो को लेते के ६ फिट के गद्दे में जाके गिरा दिया और फ़िर होमगार्ड तो wआहन से भाग गई और सावरिया अपने अपने घर चली गई और कहानी वही कि वही रही...यानि कि कल फ़िर कोई टेंपो को गद्दे में गिरा देगा और कोई मर भी जाए तो किसी को क्या फरक पड़ता है...