Pages

Thursday, September 8, 2022

मजेदार कहानी

एक मजेदार कहानी सुनिए । कहानी के अंत में अब नैतिक शिक्षा ढूंढ लीजिएगा ।
आज मैं बैंक में गया अपने खाते संबंधित कुछ जानकारी के लिए ।मैं बैठा इंतजार कर रहा था अभी अपने कार्य में प्रबंधक साहब कुछ व्यस्त थे ,इतने में देखा कि एक बुजुर्ग आए और उनकी और प्रबंधक के बीच कहासुनी होने लगी ।धीरे-धीरे वह गरमा गरम बहस में बदल गई जो मुझे सुनने में आया ।वह यह था कि बुजुर्ग के अकाउंट से कुछ पैसे बैंक ने काट लिए हैं, बैंक के हिसाब से वह चार्जेस थे और बुजुर्ग के हिसाब से यह कटौती थी जबरदस्ती वाली ।
खैर जब मैं बाद में मैनेजर साहब से मिला तो मैंनेजर साहब बड़े परेशान थे ।मैनेजर साहब से मैंने पूछा कि साहब क्या हुआ तो मैनेजर साहब बोले इन के अकाउंट में ₹80000000 पड़े हैं लेकिन इनके किसी कारण से ₹248 कट गए और यह पिछले 3 दिन से मुझे आकर धमकाते हैं कि मेरे पैसे तुमने बिना मतलब क्यों काटे ?मैं से बार-बार कह रहा हूं कि मैंने बैंक को लिखा है जवाब आएगा ,तो ठीक अगर कुछ बैंक ने नहीं किया तो यह ₹248 मैं आपके अकाउंट में जमा कर दूंगा .आप परेशान मत होइए .
मैं तब से सोच रहा हूं जिस के अकाउंट में ₹80000000 हो और उसकी उम्र 72 साल हो वह ₹248 के लिए क्यों परेशान होगा ? वह 80000000 तो अपने पूरे जीवन में खर्चा नही कर पाएगा फिर ₹248 के लिए इतनी परेशानी ?

Wednesday, September 7, 2022

आज की जनता

 1 दिन की बात है दो लोग आपस में बातें कर रहे थे ।उनकी बातचीत का मुख्य विषय था कि देश की समस्या का समाधान कैसे निकलेगा ,देश में लगातार समस्याएं बढ़ती जा रही है, और समाधान नहीं निकल रहा है ।दोनों बड़ी देर से चर्चा कर रहे थे और दूर बैठे एक लड़का उनकी बातचीत सुन रहा था। थोड़ी देर बाद दोनों लोगों ने बताया कि हां इससे समस्या का समाधान हो सकता है, लड़का क्योंकि कुछ दूर बैठा हुआ था। उसको सुनाई नहीं पड़ा तो लड़का उठ कर उनके पास गया और पूछा कि बताइए इस देश की समस्या का आपने क्या समाधान निकाला है ,तो उनमें से एक व्यक्ति ने बताया कि अगर हम देश के सभी लोगों को एक जेल में डाल दें और उनके साथ एक गधे को भी जेल में डाल दें तो समाधान निकल आएगा ।लड़के ने बड़े आश्चर्य से पूछा,श्रीमान आखिर जेल में गधे को क्यों डाल रहे हैं ?तभी वह व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से बोला देखा, देश की सबसे बड़ी समस्या यही है कि व्यक्तियों को जेल में डाला तो इनको चिंता नहीं थी। पर गधे को जेल में क्यों डाला इस बात की बड़ी चिंता है ।और यही आज हमारे देश की चिंता का विषय है और यही आज की देश की समस्या है

Wednesday, October 13, 2010

मेरे पापा

पापा तुम इतने अच्छे कैसे हो,तुम हसते तो हम हसते है
तुम रोते भी हो पर हम हसते है ,क्येंकि तुम्हरे आसूँ नहीं बताते है

पापा तुम हो तो कार है, खिलोने है , घोडा है गाड़ी है
पापा तुम हो तो जग कि हर खुशी मेरी मुठी में है

माँ महान है उनका जैसे कोई नहीं उन्होंने हर कुछ दिया पूरी शिक्षा दी, सब सिखाया सब समझाया
पर पापा जो तुमने शांत रह कर प्यार से ,बिना कहे बिना सुने जो कहा वो हर पल दिल ने समाया

पापा तुम सब सहते हो, सब सुनते हो , थक जाते हो पर आप दुखी नहीं होते
तुम जादू हो, तुम ईश्वर हो, तुम पापा हो पर कभी नाराज नहीं होते

पापा तुम रात में माँ के सोने के बाद भी मेरे एक आवाज में उठ जाते
पापा तुम दिन में और रात में मेरे चेहरे को देखते और फिर सोने जाते

पापा अगर हम बीमार है तो तुम बीमार हो, अगर हम नाराज है तो तुम नाराज हो
पापा अगर हम भूखे है तो तुम भूखे हो, अगर हम प्यासे है तो तुम प्यासे हो

पापा तुम्हारे सपने है हम, पापा तुम्हारी दुनिया है हम
पापा तुम हमारे सूरज और हम आक के चंदा हैं हम

पापा तुम कितने अच्छे हो, पापा तुम कितने सीधे हो, पापा तुम प्यारे हो
पापा तुम तुम हो तुम दुनिया में सबसे लाज़बाब और हमारे हो तुम

पापा तुम सुबह निकले तो हम साथ थे, तुम रात को आये तो हम साथ थे
पापा तुम जागे तो हम साथ थे, तुम सोये तो हम साथ थे

पापा अब तुम आराम करो, पापा अब तुम आदेश करो..
पापा अब आप मैं हूँ, पापा तुम अब अपना ख्याल करो

पापा आप ने वो सिखाया जो , आज मैं अपने पैरो पर खड़ा हुआ
पापा आप का एक एक शब्द आज मेरा जबाब हुआ

मेरे पापा मेरे पापा तुम हो सबसे न्यारे तुम हो हमको प्यारे
तब भी पापा अब भी पापा तुम आज तक बेमिसाल हो...

Monday, March 23, 2009

एक नई दिशा

एक नई दिशा हैं , नई दिशा , एक नई दिशा

एक नई दिशा से चलकर देखें , एक नई दिशा हैं


संबंधो का अजीब चक्कर,

आपस में अपनों से टक्कर

दुःख देते हैं, दुःख लेते हैं,

आखिर ये सब क्यें कर? एक नई दिशा हैं


इस नई दिशा की तहजीब क्या हैं ?

नई दिशा की तरकीब क्यां हैं ?

ये नया सलीका ,नया तरीका,

नई सोच, नई पहचान ? हैं कैसे दिशा ?

हैं सरल दिशा, खुला हैं भेद,

नया माध्यम , वही संकेत,

नई हैं आशा, अभीलाषा,

प्रेम ही इसकी परिभाषा हैं ऐसी दिशा

सुनने का हैं दंग नया,

कहने का हैं रंग नया

नज़र वही,नजरिया नयी,

साज़ वही,आवाज़ नयी हैं ऐसी दिशा

गुण देखें,अवगुण न देखें,

ख़ुद को बस अगले में देखें,

विचार की धारा देखें,

उसीको नए तरह से देखें हैं ऐसे दिशा

इस नयी दिशा से क्यें चले हम?

जो चल रहा हैं, क्यें बदले हम?

ये नया सुर , ये नया ताल,

ये नया राग, ये नयी रागिनी-क्यें सीखे हम?

गौर से देखो, दौर नया हैं,

बदल रहा मौसम नया हैं,

तौर तरीके बदल रहें हैं,

बदल रही सारी दुनिया हैं नयी दिशा से चल रही हैं

इस नए दौर से क्यें डरते हो?

हिचकिचाहट क्यें करते हों?

गर जीना हैं इस दुनिया में?

तो बदलना ही हैं हमें नयी दिशा से चलना हैं

इस नयी दिशा से चलकर देखें,

नया सपना सब मिलकर देखें,

ये नया होश हैं,नया जोश हैं,

नयी जान , हैं नया जहाँ इस नयी दिशा से

अर्थ वही,भावार्थ नया,

गाने का अंदाज़ नया,

हैं वही सुर, हैं वही ताल,

हैं वही राग, ख्याल नया इस नयी दिशा से

हो तुम वही,हैं हम वही,

हैं बोल वही,बोली नयी,

हैं दिल वही,धड़कन वही,

हैं साँस वही,अहसास नया इस नयी दिशा से

बदलना हैं,पर समय कहाँ,

वक्त के हैं, बड़े सख्त यहाँ,

फुर्सत मिलेगी जब काम से

तब बदलेंगें आराम से

काल चक्र से कौन बचा हैं

बीते कल से आज रचा हैं,

तब की बात कुछ और रही,

अब जो हैं,अभी नही

अब समय हैं निर्णय का,

तूफान आंधी, प्रलय का,

बैठे बहने की आड़ में,

तो बह जायेंगे बाद में

समझके वक्त के तकाजे को

जो ‘आ’ कहे बदलो को

बस वही टिके रहेंगे

बाकि सब डल जायेंगे

अबतक जो करते आयें हैं

गर वही करते रहेंगे,

अब तक जो पाते आयें हैं,

वही पाते रहेंगे

बने रहे कोल्हूके बैल

वही बीज, तो वही तेल,

मुक्त करें, बंधन को खोलें,

नयी पारी,नयी लगन से खेलें

इस नयी दिशा से चलकर देखें,

नया सपना सब मिलकर देखें, ,

वीरानो में खिलकर देखें,

नयी अगन में जलकर देखें,

एक नयी लगन से खुलकर देखें,

ख़ुद,बस थोड़ासा बदलकर देखें,

नयी दिशा हैं,नयी दिशा हैं, नयी दिशा हैं,

इस नयी दिशा से चलकर देखें, नयी दिशा हैं

रचनाकार- अरविन्द नादकर्णी


Monday, January 19, 2009

आज कि ताज़ा khabar

आज सुनो आवाज सुनो....मैं इधर बहुत दिनोसे सोच रहा था कि कुछ खबरों का ब्लॉग सुरु किया जाए जहा मैं रोज की रोज कानपूर की खास खबरें दल दिया करूँ और बाकि लोग पड़ लिया करें पर मुझे लगता हैं कि मैं आज कम को सुरु कर दिया हैं.तो अब आप कि बरी हैं साडी खबरें पड़े और मुझे बताएं कि आप किस तरह कि खबरें पड़ना चाहते हैं मैं वैसे कि वैसे खबरें फ़िर ज्यादा से ज्यादा प्रकाशित किया करूँ।

अब ये देखिये कि कल का दिन कानपूर के लिए अच्छा नही रहा .असल में यहाँ पर पुलिस और टेंपो वालो कि पार्टनरइसप चलती हैं जहा पर कुछ ले देके वो टेंपो को कही भी रोक सकते हैं कही भी खड़ा कर सकते है और तो और कितनी भी सवारिया बैठा सकते हैं.तो हुआ भी वाहजी। कल एक महिला होमगार्ड ने एक टेंपो वाले को रोका तो वो भगा और भागा भी ऐसे कि अपने साथ पुरे टेंपो को लेते के ६ फिट के गद्दे में जाके गिरा दिया और फ़िर होमगार्ड तो wआहन से भाग गई और सावरिया अपने अपने घर चली गई और कहानी वही कि वही रही...यानि कि कल फ़िर कोई टेंपो को गद्दे में गिरा देगा और कोई मर भी जाए तो किसी को क्या फरक पड़ता है...